नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह इस सप्ताह भारत और चीन के राजदूतों से अलग-अलग मुलाकात करने की तैयारी में हैं। नेपाली मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक उन्होंने विदेशी राजदूतों के साथ औपचारिक बैठकों से दूरी बनाए रखी थी, लेकिन पहली बार वह इस स्वयं निर्धारित परंपरा को तोड़ने जा रहे हैं। माना जा रहा है कि यह कदम नेपाल की संतुलित विदेश नीति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत है।
सूत्रों के मुताबिक, बलेंद्र सरकार के 100 दिन पूरे होने के अवसर पर इन बैठकों का आयोजन किया जा सकता है। हालांकि, मुलाकातों की आधिकारिक तारीख की घोषणा अभी नहीं की गई है। सरकार के करीबी सूत्रों का कहना है कि नेपाल यह संदेश देना चाहता है कि उसके लिए नई दिल्ली और बीजिंग दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण साझेदार हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल लंबे समय से भारत और चीन के बीच संतुलन बनाकर चलने की नीति अपनाता रहा है। भारत के साथ उसके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध बेहद मजबूत हैं। व्यापार, ऊर्जा, खाद्यान्न, दवाइयों और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में नेपाल काफी हद तक भारत पर निर्भर है।
वहीं दूसरी ओर, चीन ने हाल के वर्षों में नेपाल में सड़क, रेल और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर निवेश बढ़ाया है। ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ जैसी योजनाओं के माध्यम से बीजिंग अपनी रणनीतिक उपस्थिति मजबूत कर रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि वर्तमान क्षेत्रीय परिस्थितियों में नेपाल किसी एक पक्ष के करीब जाने के बजाय दोनों पड़ोसी देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है। यही नीति आने वाले समय में उसकी कूटनीतिक प्राथमिकताओं का आधार बन सकती है।