हिंदी दिवस के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारतीय भाषाओं की विविधता को देश की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए युवाओं से अधिक से अधिक भाषाएं सीखने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि हिंदी किसी अन्य भारतीय भाषा की प्रतिद्वंद्वी नहीं है। मातृभाषा का सम्मान बनाए रखते हुए दूसरी भाषाओं का ज्ञान हासिल करना राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समझ को मजबूत करता है।
वर्चुअल संबोधन में शाह ने हिंदी के प्रचार-प्रसार में गैर-हिंदी भाषी महानायकों के योगदान को भी रेखांकित किया। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाषचंद्र बोस का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि बंगाली होने के बावजूद नेताजी ने हिंदी को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिया। आजाद हिंद फौज में हिंदी संपर्क की प्रमुख भाषा थी और ‘जय हिंद’ जैसे नारे ने राष्ट्रीय चेतना को नई ऊर्जा दी।
शाह ने स्वामी दयानंद सरस्वती और महात्मा गांधी के योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दयानंद सरस्वती ने हिंदी में ‘सत्यार्थ प्रकाश’ की रचना की, जबकि गांधी ने दक्षिण भारत में हिंदी के प्रचार के लिए संस्थागत प्रयास किए।
अपने संबोधन में शाह ने कहा कि उनकी मातृभाषा गुजराती है, लेकिन देश के अलग-अलग हिस्सों में संवाद के लिए हिंदी उपयोगी माध्यम बनती है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी मातृभाषा को कभी न छोड़ें और साथ ही अन्य भारतीय भाषाओं को सीखने के लिए भी आगे आएं। उनके अनुसार, भाषाएं लोगों को इतिहास, संस्कृति, मिट्टी और सामाजिक विरासत से जोड़ती हैं।